अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने “ग्रेट अमेरिका” के नारे के साथ 100 देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ (प्रतिसादात्मक कर) लगाने का ऐलान किया। इस फैसले के तहत भारत पर 26%, चीन पर 34%, बांग्लादेश पर 37% और कंबोडिया पर 49% का टैरिफ लगाया गया। लेकिन सबसे बड़ा झटका अफ्रीका के छोटे से देश लेसोथो को लगा, जिस पर 50% का भारी-भरकम टैक्स लगाया गया।
लेसोथो: एक छोटा देश, बड़ी मार
लेसोथो दक्षिणी अफ्रीका में स्थित एक छोटा देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था मात्र $2.1 बिलियन की है। यह मुख्य रूप से हीरा (डायमंड) और वस्त्र निर्यात पर निर्भर है। अमेरिका इसके निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य है, जिससे इसकी अर्थव्यवस्था को बड़ी मजबूती मिलती थी।
ट्रंप प्रशासन ने लेसोथो पर सबसे ऊंचा टैरिफ क्यों लगाया?
ट्रंप प्रशासन ने टैरिफ तय करने के लिए एक विशेष फॉर्मूला अपनाया। इसमें किसी देश के अमेरिकी बाजार में व्यापार अधिशेष को कुल निर्यात से विभाजित कर, फिर उसे दो से घटाया गया। इस गणना के आधार पर लेसोथो को 50% और मेडागास्कर को 47% का टैरिफ झेलना पड़ा।
कारण:
लेसोथो ने 2022 में अमेरिका को $264 मिलियन का निर्यात किया था, जबकि अमेरिका से मात्र $8 मिलियन का आयात किया।
इस बड़े व्यापारिक अंतर को देखते हुए, ट्रंप प्रशासन ने लेसोथो को व्यापार असंतुलन और नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए सबसे ऊंचा टैरिफ लगाया।
यह पहला मौका नहीं है जब ट्रंप ने लेसोथो को निशाना बनाया। मार्च में कांग्रेस के संबोधन में उन्होंने सवाल उठाया था कि अमेरिका क्यों LGBTQI अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए लेसोथो को $8 मिलियन की सहायता दे रहा है, जब “कोई इस देश को जानता भी नहीं”?
लेसोथो की 70% अर्थव्यवस्था अमेरिका को किए गए निर्यात पर निर्भर थी, जो अब African Growth and Opportunity Act (AGOA) के तहत शुल्क-मुक्त व्यापार का लाभ नहीं ले सकेगा। इस फैसले से लेसोथो की अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगेगा और हजारों नौकरियों पर संकट मंडराने लगेगा।