पटियाला में कर्नल पुष्पिंदर सिंह और उनके बेटे के साथ पंजाब पुलिस के जवानों द्वारा की गई मारपीट का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। कर्नल पुष्पिंदर सिंह ने याचिका दाखिल कर कहा कि वह भारतीय सेना में सेवारत कर्नल हैं और एक संवेदनशील पद पर तैनात हैं।
मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि क्या पंजाब पुलिस को लोगों को पीटने का लाइसेंस मिल गया है? अदालत ने स्पष्ट रूप से आदेश दिया कि उस अफसर का नाम बताया जाए, जिसने शिकायत मिलने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। हाईकोर्ट ने आठ दिनों तक कोई कार्रवाई न करने पर पंजाब सरकार से जवाब तलब किया।
इस मामले में एक कांस्टेबल रणदीप भी घायल हुआ था, जिसने भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि पंजाब पुलिस को खुद ही पंजाब सरकार पर भरोसा नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, अदालत ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया।
घटना 13 और 14 मार्च की रात पटियाला के हरबंस ढाबा के बाहर हुई थी, जब पंजाब पुलिस के चार इंस्पेक्टर और आर्म्ड पुलिस कर्मियों ने कर्नल और उनके बेटे के साथ मारपीट की। वहां मौजूद लोगों के सामने उनका आईडी कार्ड छीना गया और फर्जी एनकाउंटर की धमकी दी गई। यह मामला बेहद गंभीर है और हाईकोर्ट ने इसे संज्ञान में लिया है।
मामले के बाद से पंजाब पुलिस पर अपने ही अधिकारियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं। पुलिस ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की और वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने का प्रयास किया। ऐसे में हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं और मामले को अन्य एजेंसी को सौंपने की जरूरत जताई है।
आरोपियों ने वीडियो कॉल कर मांगी माफी
दिलचस्प बात यह है कि आरोपी पुलिस अधिकारियों ने बाद में कर्नल की पत्नी को वीडियो कॉल कर माफी भी मांगी। इससे यह साफ हो गया कि उन्होंने खुद अपना गुनाह कबूल कर लिया है। चूंकि मामले में पंजाब पुलिस के ही अधिकारी और कर्मी आरोपी हैं, इसलिए इसकी जांच पंजाब पुलिस से नहीं कराई जा सकती।
कर्नल पुष्पिंदर सिंह ने CBI जांच की मांग की है और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी गुहार लगाई है। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार को जल्द से जल्द जवाब देने के निर्देश दिए हैं।