अगर आप रेस्टोरेंट में खाना खाते हैं, तो आपको 5% जीएसटी देना होगा, लेकिन अगर खाने के बाद आइसक्रीम खा ली, तो यह दर बढ़कर 18% हो जाएगी। इसी तरह, रोटी और पराठे पर अलग-अलग जीएसटी दरें लागू होती हैं। यह जीएसटी प्रणाली की कुछ जटिलताओं को दर्शाता है, जिससे व्यापारी और उपभोक्ता दोनों परेशान हो जाते हैं।
अगर किसी रेस्टोरेंट को “एसी रेस्टोरेंट” का दर्जा मिला हुआ है, तो वहां किसी भी खाने-पीने की चीज पर 18% जीएसटी लगेगा, भले ही एसी चल रहा हो या नहीं। इससे ग्राहक भ्रमित होते हैं और दुकानदारों को बिलिंग में दिक्कत होती है।
खुदरा बाजार में असमानता
कपड़े और फुटवियर की जीएसटी दरें भी मूल्य के आधार पर बदलती हैं। ₹1000 से कम कीमत वाले कपड़ों पर अलग टैक्स लगेगा और उससे ज्यादा कीमत पर अलग। इसी तरह, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों पर कोई टैक्स नहीं है, लेकिन अगर वही सामान पैक किया जाए, तो उस पर जीएसटी लागू हो जाएगा।
व्यापारियों को नुकसान और कानूनी झंझट
जीएसटी की इन विसंगतियों की वजह से कई व्यापारी गलती कर बैठते हैं, जिससे उन्हें पेनाल्टी चुकानी पड़ती है। ग्राहक भी खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी प्रणाली में सुधार की जरूरत है, ताकि यह सरल और सभी के लिए सुविधाजनक हो।
स्लैब कम करने की मांग
जीएसटी की वर्तमान प्रणाली में चार टैक्स स्लैब (5%, 12%, 18% और 28%) हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसे घटाकर तीन किया जाना चाहिए। इससे कर प्रणाली आसान होगी और व्यापार जगत में मुकदमेबाजी भी कम होगी।
राजस्व पर असर नहीं पड़ेगा
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीएसटी दरों में कटौती से सरकार के राजस्व में कमी नहीं आएगी। दरअसल, दरें कम होने से वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे उनकी मांग बढ़ेगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार में बढ़ोतरी होगी और सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा।
आगामी बैठक में संभावित चर्चा
जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में दरों को तर्कसंगत बनाने और कुछ वस्तुओं पर टैक्स दरों को कम करने पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, राज्यों को अपने राजस्व में कमी की चिंता बनी हुई है। जानकारों का कहना है कि अगर कर संग्रह बढ़ता है, तो राज्यों को वित्तीय नुकसान नहीं होगा, क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार के कर संग्रह से भी हिस्सा मिलता है।
सरल और न्यायसंगत जीएसटी प्रणाली से व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलेगी, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।