हरियाणा में डॉक्टरों ने अपनी विभिन्न मांगों, खासकर सीनियर मेडिकल ऑफिसर्स (SMO) की सीधी भर्ती को लेकर आज से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इससे पहले 8 और 9 दिसंबर को भी डॉक्टरों ने दो दिवसीय हड़ताल की थी, लेकिन सरकार के साथ बातचीत विफल रहने के बाद उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल का निर्णय लिया।
हड़ताल के चलते राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। झज्जर सिविल अस्पताल में ओपीडी के बाहर भारी भीड़ नजर आई, वहीं पंचकूला में एक्स-रे के लिए लंबी लाइनें लगीं। कई जगह मरीजों को अल्ट्रासाउंड और जांच करवाने के लिए भटकना पड़ा।
पिछली हड़ताल (8–9 दिसंबर) के दौरान भी ओपीडी, इमरजेंसी सहित कई जरूरी सेवाएं ठप रहीं। कुछ जिलों में पोस्टमॉर्टम भी रुक गए। महेंद्रगढ़ में एक लड़की का पोस्टमॉर्टम नहीं हो सका और केस को नारनौल रेफर कर दिया गया। भिवानी, करनाल, झज्जर, हिसार, फतेहाबाद और गुरुग्राम में अव्यवस्था की आशंका के चलते प्रशासन ने धारा 163 लागू कर दी और किसी भी तरह के प्रदर्शन पर पाबंदी लगा दी।
सरकार की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था:
डॉक्टरों की हड़ताल को देखते हुए हरियाणा सरकार ने स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
— DMER के करीब 540 डॉक्टर,
— आयुष विभाग के 500 डॉक्टर,
— ESI के 75 डॉक्टर,
— आयुष्मान भारत से जुड़े निजी अस्पतालों के 300 डॉक्टर,
— NHM के 490 डॉक्टर
राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात किए गए हैं।
ESMA लागू:
हड़ताल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार ने अगले छह महीनों के लिए ESMA (ज़रूरी सेवाएं रख-रखाव अधिनियम) लागू कर दिया है। सरकार का कहना है कि डॉक्टरों की हड़ताल से गंभीर रूप से बीमार मरीजों की देखभाल और आम जनता तक स्वास्थ्य सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ेगा।

