बीती रात लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिल की कॉपी फाड़ते हुए अपना विरोध जताया, जिससे संसद में बवाल मच गया। संसदीय परंपराओं में इस तरह की घटनाएं कम ही देखने को मिलती हैं। ओवैसी ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इसे फाड़ना गांधीजी के विरोध के तरीकों जैसा है।
क्या बिल फाड़ना संसद के नियमों के खिलाफ है?
लोकसभा में बिल की कॉपी फाड़ना संसदीय मर्यादा का उल्लंघन माना जाता है। इस तरह के आचरण पर लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति कार्रवाई कर सकते हैं, हालांकि, आमतौर पर सख्त सजा नहीं दी जाती। इतिहास में कई बार सांसदों ने बिल की कॉपी फाड़कर अपना विरोध जताया है, जिससे यह मामला ज्यादा तूल पकड़ता रहा है।
पहले भी हो चुका है ऐसा विरोध
2019: नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA) के दौरान भी ओवैसी ने बिल की कॉपी फाड़ी थी।
2011: राजद सांसद राजनीति प्रसाद ने लोकपाल विधेयक की कॉपी फाड़ी थी।
2001: शरद यादव ने महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करते हुए उसकी कॉपी फाड़ी थी।
वक्फ संशोधन विधेयक पर ओवैसी का तर्क
ओवैसी ने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला बताया। उनका दावा है कि यह बिल धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। प्रस्तावित संशोधनों में गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना और संपत्ति विवादों में हाईकोर्ट की भूमिका बढ़ाना शामिल है, जिसे उन्होंने मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर करने वाला कदम बताया।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
अब यह देखना होगा कि संसद इस घटना पर क्या रुख अपनाती है और ओवैसी के इस कृत्य पर कोई औपचारिक कार्रवाई होती है या नहीं।