चंडीगढ़, 8 दिसंबर 2025:
पंजाब की राजनीति में एक बड़ा धमाका तब हुआ जब एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की पत्नी ने चौंकाने वाला दावा किया कि राज्य में मुख्यमंत्री पद पाने के लिए 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की रकम चुकानी पड़ती है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
लोगों के मन में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या 500 करोड़ खर्च कर मुख्यमंत्री बनने वाला नेता जनता की भलाई के बारे में सोचेगा? विशेषज्ञों का कहना है कि जब कोई नेता सत्ता हासिल करने के लिए इतनी बड़ी रकम लगाता है, तो उसका पहला लक्ष्य जनता की सेवा नहीं, बल्कि अपनी “निवेश राशि” की भरपाई कई गुना करना होता है। यही कारण है कि ऐसे नेता फिर भ्रष्टाचार, बड़े ठेकों और राजनीतिक सौदों में जुट जाते हैं।
इस विवाद के बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार की ईमानदारी और पारदर्शिता एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में सामने आती है। मान सरकार ने बिना किसी घोटाले या महंगे राजनीतिक खेल के, पंजाब में 500 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश लेकर राज्य के युवा और अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। यह निवेश रोजगार बढ़ाने, उद्योगों के विस्तार और पंजाब की आर्थिक सेहत सुधारने में मदद करेगा।
दूसरी तरफ, विपक्ष पर लगे आरोप न सिर्फ कांग्रेस बल्कि पूरे राजनीतिक सिस्टम पर सवाल उठाते हैं। आरोप यह संकेत देते हैं कि सत्ता अब सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि “निवेश से कमाई” का एक कारोबार बन गई है। यह संस्थागत भ्रष्टाचार की चरम सीमा है, जिसने पंजाब की राजनीति को एक अंधेरी दिशा में धकेला है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जब CM की कुर्सी 500 करोड़ रुपये में बिकने लगे, तो आम आदमी की समस्याएँ—टूटी सड़कें, किसानों की परेशानी, बेरोजगारी—सिर्फ भाषणों तक सिमट कर रह जाती हैं।
ऐसे माहौल में, मान सरकार की नीतियाँ और काम करने का तरीका लोगों में भरोसा पैदा करता है। मुख्यमंत्री भगवंत मान बार-बार यह संदेश दे चुके हैं कि राजनीति “शाही ठाट” का नहीं बल्कि “लोक सेवा” का माध्यम है। उनकी सरकार शिक्षा सुधार, नशा-मुक्त पंजाब, किसानों के हक और भ्रष्टाचार मुक्त सिस्टम पर फोकस कर रही है।
पंजाब को ऐसी ही पारदर्शी और जवाबदेह सरकार की जरूरत है जो पैसे से नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे से सत्ता में आए।
लोगों की राय में बढ़ते हुए कहा जा रहा है—
“मान सरकार पंजाब की नई उम्मीद है।”

