अमेरिका: H1-B वीज़ा नियमों को लेकर ट्रंप प्रशासन ने बड़ी सख्ती लागू करते हुए पूरी प्रक्रिया को कड़ा कर दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए आदेश के बाद अब H1-B वीज़ा आवेदकों की गहन जांच की जाएगी, जिसमें सोशल मीडिया अकाउंट की अनिवार्य स्क्रूटनी भी शामिल है।
इस फैसले का सबसे अधिक असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा, जो हर साल H1-B वीज़ा प्राप्त करने वालों की सूची में शीर्ष पर होते हैं।
सोशल मीडिया अकाउंट अब जांच का हिस्सा
नए नियमों के तहत H1-B वीज़ा के लिए आवेदन करने वालों को अपने सभी प्रमुख सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक (public) रखने होंगे, ताकि अमेरिकी अधिकारी उनकी पोस्ट, गतिविधियां और इंटरैक्शन की जांच कर सकें।
यदि किसी भी गतिविधि को अमेरिकी हितों के खिलाफ माना जाता है, तो वीज़ा जारी नहीं किया जाएगा।
परिवार पर भी लागू होंगे नियम
H1-B पर निर्भर परिवारजनों (H4 वीज़ा धारकों) — जिनमें पति/पत्नी, बच्चे और माता-पिता शामिल हैं — को भी सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक रखने होंगे।
पहली बार सोशल मीडिया वेरिफिकेशन हुआ अनिवार्य
यह पहली बार है जब H1-B वीज़ा प्रक्रियाओं में सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच को औपचारिक रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।
नए नियम 15 दिसंबर से लागू होंगे और विदेशों में स्थित सभी अमेरिकी दूतावासों को इसके लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
वीज़ा फीस में भारी बढ़ोतरी
पहले H1-B वीज़ा की फीस लगभग 9,000 डॉलर (करीब 7.5 लाख रुपये) थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में इसे बढ़ाकर लगभग 90 लाख रुपये के बराबर कर दिया।
टेक कंपनियों पर प्रभाव
H1-B वीज़ा अमेरिकी टेक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न सहित कई टेक कंपनियां भारतीय और चीनी पेशेवरों पर बड़ी संख्या में निर्भर रहती हैं।
इसी वर्ष अगस्त से ही F-1, J-1, M-1 स्टूडेंट वीज़ा और B-1/B-2 विज़िटर वीज़ा के लिए भी सोशल मीडिया स्कैन अनिवार्य किया जा चुका है।
ट्रंप प्रशासन के इन नए नियमों से H1-B प्रक्रिया न सिर्फ महंगी बल्कि अधिक जटिल हो गई है, जिसकी सीधी चोट भारतीय आईटी पेशेवरों और विदेशी छात्रों पर पड़ने की आशंका है।

