जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसकी मार खेती पर भी गहराती जा रही है। शोध बताते हैं कि यदि तापमान हर 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो फसल उत्पादन में 6 से 8% तक गिरावट आ सकती है। ऐसे में पौधों की गर्मी सहने की क्षमता कृषि और खाद्य सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
वैज्ञानिकों ने खोजी गर्मी सहने की क्षमता
चीन की चीनी एकेडमी ऑफ साइंसेज के इंस्टिट्यूट ऑफ जेनेटिक्स एंड डेवलपमेंटल बायोलॉजी (IGDB) के प्रोफेसर जू काओ की टीम ने इस दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उन्होंने टमाटर के पौधों में एक नई जैविक प्रक्रिया की खोज की है, जिससे पौधा भीषण गर्मी में भी अपनी उपज बरकरार रख सकता है। यह अध्ययन 2 अप्रैल को जर्नल डेवलपमेंटल सेल में प्रकाशित हुआ है।
गर्मी में क्यों रुक जाती है पौधों की बढ़त?
शोध के अनुसार, टमाटर के पौधों में मौजूद ‘शूट एपिकल मेरिस्टम’ (SAM) – यानी वे स्टेम सेल्स जो पत्ते और फूल बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं – तेज गर्मी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अधिक तापमान के कारण इनमें गड़बड़ी हो सकती है, जिससे पौधे की बढ़त रुक जाती है या वह सूख सकता है।
लेकिन प्रोफेसर जू काओ की टीम ने पाया कि गर्मी के दौरान पौधे के अंदर ‘रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ (ROS)’ बनती हैं, जो एक विशेष TMF प्रोटीन को सक्रिय कर देती हैं। यह प्रोटीन पौधे को फूल बनने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोकने का संकेत देता है, जिससे पौधा “डॉर्मेंसी” (निष्क्रियता) की स्थिति में चला जाता है। जैसे ही तापमान सामान्य होता है, पौधा फिर से बढ़ने और फलने-फूलने लगता है।
इस तकनीक की मदद से पहले फल वाले हिस्से की 34 से 63% तक उपज को बचाया जा सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज जलवायु परिवर्तन के दौर में गर्मी सहनशील फसलें विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे “क्लाइमेट स्मार्ट क्रॉप्स” विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जो कठिन परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन दे सकें।